Religious curriculum prepared in Uttarakhand: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों के लिए धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से तैयार इस पाठ्यक्रम में धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत के साथ भारतीय इतिहास और राष्ट्रवाद से जुड़े विषयों को भी महत्व दिया गया है। प्राधिकरण ने कक्षा 1 से 8 तक के पाठ्यक्रम पर पहले काम पूरा किया था, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम को भी अंतिम रूप दिया गया है।
पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई समुदायों से जुड़े शिक्षाविदों ने अपने-अपने धार्मिक विषयों के लिए सुझाव दिए। प्राधिकरण का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अपनी धार्मिक परंपराओं, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर देना है। इसके तहत धार्मिक अध्ययन को व्यवस्थित पाठ्यक्रम के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।
इस पहल के साथ राज्य की अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने काम शुरू किया है। नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में हिंदी, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे सामान्य विषयों की पढ़ाई पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के साथ सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और राष्ट्रसेवा की भावना को बढ़ावा देना भी इस पहल का उद्देश्य है।
धार्मिक पाठ्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि धार्मिक शिक्षा में नफरत, हिंसा और कट्टरता को बढ़ावा देने वाली सामग्री के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे लागू करने के लिए शासन के शिक्षा विभाग की मंजूरी की प्रक्रिया का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। इसलिए पाठ्यक्रम की अंतिम स्वीकृति और लागू होने की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक आदेश से करना जरूरी है।
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