बर्मिंघम में प्रीतम भरतवाण-विवेक नौटियाल का जलवा, शिल्पा भट्ट का उत्तराखंड की संस्कृति को विश्वभर में बढ़ावा देने का संकल्प!

Pritam Bharatwan and Vivek Nautiyal shine in Birmingham: उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक संगीत की गूंज ब्रिटेन के बर्मिंघम में सुनाई दी, जहां पद्मश्री सम्मानित डॉ. प्रीतम भरतवाण, जिन्हें जागर सम्राट के नाम से जाना जाता है, ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। इस सांस्कृतिक संध्या का आयोजन उत्तराखंड वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन और शिल्पा प्रोडक्शन की ओर से किया गया, जिसमें पूरे यूनाइटेड किंगडम से बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी शामिल हुए। शिल्पा प्रोडक्शन की संस्थापक शिल्पा भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, लोकसंगीत और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाने के लिए भविष्य में भी इसी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

कार्यक्रम में डॉ. प्रीतम भरतवाण ने पारंपरिक जागर और पंवाड़ों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं से रूबरू कराया। शाम का सबसे खास आकर्षण तब रहा, जब उन्होंने अपने भाई सुरतम भरतवाण के साथ पारंपरिक ढोल-दमाऊ की थाप पर प्रस्तुति दी। इन पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा हॉल पहाड़ी रंग में रंग गया। दर्शक देर रात तक झूमते रहे और कार्यक्रम का उत्साह लगातार बना रहा।

इस सांस्कृतिक आयोजन में अंजलि खरे, सुरतम भरतवाण और प्रसिद्ध गायक विवेक नौटियाल सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। गायक विवेक नौटियाल की मौजूदगी ने भी इस संगीतमय शाम को खास बनाया। कार्यक्रम में कलाकारों और प्रवासी उत्तराखंडियों ने एक मंच पर आकर अपनी सांस्कृतिक पहचान और लोकपरंपराओं का उत्सव मनाया।

इस दौरान प्रीतम भरतवाण ने विदेश में रह रहे उत्तराखंडियों से अपनी मातृभाषा गढ़वाली और कुमाऊंनी को घरों में बोलने तथा नई पीढ़ी को पारंपरिक लोकगीतों और संस्कृति से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहना केवल पुरानी यादों को संजोना नहीं, बल्कि अपनी पहचान और जड़ों का सम्मान करना भी है।

गौरतलब है कि डॉ. प्रीतम भरतवाण को उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति, जागर और लोकसंगीत के संरक्षण में उनके योगदान के लिए वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। अपने ब्रिटेन दौरे के दौरान उन्होंने लंदन में भी प्रवासी उत्तराखंडियों से मुलाकात की। बर्मिंघम में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि पहाड़ का संगीत और संस्कृति हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों को भी अपनी मिट्टी और जड़ों से जोड़े रखते हैं। कार्यक्रम का समापन उत्तराखंड की लोकपरंपराओं, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के साथ हुआ।

Aarti Rawat
Aarti Rawat