‘Article 370′ Wins Best Feature Film : 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में आयोजित किया गया। आयोजित समारोह में ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (Best Feature Film) के पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके साथ ही यामी गौतम को फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (Best Actress in a Leading Role) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस फिल्म का निर्देशन आदित्य सुहास जांभले (Aditya Suhas Jambhale) ने किया है। निर्देशक के रूप में यह उनकी पहली फीचर फिल्म (Debut Film) है, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक (Best Debut Director) की श्रेणी में भी बेहद सराहना मिली है। यह फिल्म 23 फरवरी 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। सिनेमाघरों में सफलता के बाद इसे 19 अप्रैल 2024 को Netflix पर रिलीज किया गया।
Article 370 में इन अभिनेताओं ने निभाई भूमिकाएं
फिल्म में कई अभिनेताओं ने वास्तविक राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों से प्रेरित भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म में यामी गौतम ने NIA की खुफिया एजेंट जूनी हाक्सर का मुख्य किरदार निभाया है। प्रियामणि ने PMO की संयुक्त सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन की भूमिका निभाई है। जबकि अरुण गोविल ने भारत के प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी से प्रेरित) का किरदार निभाया है। फिल्म में किरण करमाकर ने देश के गृह मंत्री (अमित शाह से प्रेरित) की दमदार भूमिका निभाई है।
फिल्म के बजट की बात करे तो यह फिल्म लगभग ₹20 करोड़ के सीमित बजट में बनाई गई थी। जिसके बाद फिल्म ने दुनिया भर में ₹110.57 करोड़ से ज्यादा का शानदार कलेक्शन कर बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की।
वहीं आर्टिकल 370 की कहानी की बात करें तो यह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर आधारित है। इसकी कहानी साल 2016 से शुरू होती है, जिसमें यामी ने IB की एक निडर अधिकारी जूनी हक्सर का रोल प्ले किया है। फिल्म अगस्त 2019 में भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के ऐतिहासिक और खुफिया घटनाक्रम को दर्शाती है। इस फिल्म की पूरी कहानी दो मजबूत महिला किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो देश के सबसे बड़े मिशन पर काम कर रही हैं।
फिल्म जमीन पर होने वाले खुफिया ऑपरेशन्स (गुप्त अभियानों) और दिल्ली के गलियारों में होने वाली हाई-लेवल राजनीति के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाती है। एक तरफ राजेश्वरी दिल्ली में बैठकर कानूनी बारीकियों और संवैधानिक रास्तों को तलाशती हैं, तो दूसरी तरफ जूनी कश्मीर के जमीनी मोर्चे पर आतंकवादियों, भ्रष्ट स्थानीय नेताओं और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के मंसूबों को नाकाम करती है।
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