dispute over the Gurdwara at Nagarasu has ended : हाल ही में नगरासू स्थित एक गुरुद्वारे में निहंगों के कब्जे का तनावपूर्ण घटनाक्रम आखिरकार समाप्त हो गया है। चार दिनों तक यह चर्चा और चिंता का विषय समाधान संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से निकला। आपको बता दें कि गुरुद्वारे की छत पर डटे निहंग सिख मंगलवार यानी 23 जून की शाम नीचे उतर आए हैं और बुलेट पर सवार होकर अपने धार्मिक नारों के साथ वहां से रवाना भी हो गए हैं।
बता दे यह विवाद 16 जून को करणप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच की झड़प से शुरू हुआ था जिस दौरान पुलिस ने निहंगों को गिरफ्तार किया। जिसके चलते सिख समुदाय के बीच आक्रोश बढ़ा और रिहाई की मांग कर 20 जून को 7 निहंग नगरासु गुरुद्वारा परिसर पहुंचे, और देखते देखते जिसने विवाद का रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि हेमकुंड जा रहे इन निहंगों ने गुरुद्वारे में कमरे की मांग की मैनेजमेंट मांग पूरी न करने पर इन्होंने खुद को कमरे में बंद किया। और कर्णप्रयाग घटना में गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग कर छत पर चढ़कर कब्जा किया।
घटना के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सतर्कता बनाए रखा। इसके बाद मंगलवार यानी 23 जून को पंजाब और पांवटा साहिब में पहुंचे। सिख प्रतिनिधि मंडल ने गुरुद्वारा प्रबंधन एवं छत पर मौजूद निहगो से अलग-अलग स्तर पर बातचीत की और बातचीत के बाद सहमति बनी और विवाद समाप्त हुआ।जिसके बाद शाम करीब 4:30 बजे निहंग सिख सुरक्षित रूप से नीचे उतर आए और गुरुद्वारा परिसर से रवाना हो गए।
वहीं पांवटा साहिब में पहुंचे गुणगान सिंह और अजीत सिंह का कहना है की निहंग सिख किसी भी प्रकार की नकारात्मक फैलाने के उद्देश्य से वहां नहीं आए थे। बल्की करण प्रयाग घटना को लेकर उनके भीतर आक्रोश था सरकार जिला प्रशासन और वरिष्ठ लोगों के प्रयासों से मामला शांतिपूर्ण सुलझ गया है और सभी निहंग सकुशल अपने घरों को लौट गए हैं।
