target set to run trains up to Byasi by 2028: उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को पहाड़ी और बेहद चुनौतीपूर्ण भूभाग में बनाया जा रहा है। मौजूदा योजना के अनुसार शिवपुरी से ब्यासी तक के हिस्से को जून 2028 तक तैयार कर ट्रायल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूरी परियोजना को 2029 तक पूरा करने की योजना है।
सुरंगों के बीच तैयार हो रही रेल लाइन
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी सुरंगें हैं। रेल लाइन का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के अंदर से गुजरेगा। परियोजना में 16 मुख्य सुरंगें और कई एस्केप टनल बनाई जा रही हैं। इसके अलावा बड़े पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरंग और पुल निर्माण का काम लगातार आगे बढ़ रहा है, जिससे परियोजना के अगले चरण की उम्मीद बढ़ी है।
पांच जिलों को मिलेगा फायदा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके बनने से पहाड़ों में आने-जाने वाले लोगों को सड़क परिवहन के साथ एक नया विकल्प मिलेगा। खासकर देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे क्षेत्रों के लिए यह परियोजना कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन को मिलेगी मजबूती
रेल परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और पर्यटन को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए रेल कनेक्टिविटी यात्रा को आसान बना सकती है। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में व्यापार, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की संभावना है।
2028 में ब्यासी तक ट्रेन का इंतजार
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य शिवपुरी-ब्यासी सेक्शन पर 2028 में ट्रायल ट्रेन चलाना है। इसके बाद बाकी हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पूरी परियोजना के तैयार होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल कनेक्टिविटी उत्तराखंड के परिवहन और पर्यटन के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। हालांकि अंतिम समयसीमा निर्माण की प्रगति और अन्य तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
