Agriculture Minister Ganesh Joshi signal for litchi export, PM Melody tasted :बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे के दौरान इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को मेलोडी टॉफी देने पर खूब सुर्ख़ियों में बने रहे। सोशल मीडिया पर मेलोडी को लेकर मीम से लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चाएं चली थी। बताया जा रहा है कि एक बार फिर भारत और इटली के बीच स्वाद का नया रिश्ता जुड़ने जा रहा है उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से पहली बार लीची का निर्यात इटली के लिए किया जा रहा है, जिसे राज्य के बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया है। देहरादून की लीची अपने मिठास खुशबू और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है जिसकी अनेक देश विदेशों में भारी मांग है। लेकिन सेल्फ लाइफ के कारण इसी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना हमेशा से एक चुनौती रही है। लेकिन आधुनिक पैकेजिंग तकनीक और बेहतर कोल्ड चेन के जरिए इस चुनौती को काफी हद तक कम कर लिया है।
इसीलिए पहली बार करीब 1000 किलो लीची देहरादून से दिल्ली और वहां से इटली भेजी जा रही है। लीची एक नाजुक फल है जो तीन दिन के भीतर खराब होने लगती है।और उसके सड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है जिस कारण लंबे समय तक इसका देश विदेश तक पहुंचाना एक चुनौती पूर्ण काम है।हालांकि इस बार कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की मदद से लीची को सुरक्षित तरीके से विदेश भेजने की तैयारी की गई है। लेकिन यह आधुनिक पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल लीची को लंबे समय तक ताजा और गुणवत्ता से भरा रखने में सक्षम है जिसके जरिए लीची 10 दिन है से अधिक दिनों तक सुरक्षित रह सकती है।
एनसी शाह टेक्निकल एक्सपर्ट का कहना है कि आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के कारण लीची के निर्यात देश विदेश में होने लगा है अब तक जल्दी खराब होने की वजह से इसे विदेश तक पहुंचाना एक चुनौती भरा काम था लेकिन नई पैकेजिंग प्रणाली और तापमान नियंत्रण तकनीक के जरिए इसे अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही परिवहन के दौरान लगभग 5 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना भी जरूरी होता है। और पैकेजिंग और कोल्ड चेन की मदद से तापमान को लगातार बनने में सफलता मिली है। इसी तकनीक का उपयोग करते हुए बिहार की मुजफ्फरनगर से दुबई और पंजाब की पठानकोट से कतर तक लीची भेजी जा चुकी है। देहरादून से इटली तक का निर्यात एक ऐतिहासिक पल के रूप में देखा जा रहा है।
साथ ही देहरादून लीची की विशेष खुशबू और संतुलित मिठास को देश की सर्वश्रेष्ठ लिचियों में गिना जाता है जिस वजह से बाजार में देहरादून की लीची की मांग हमेशा बनी रहती है। भविष्य में यूरोप समेत अन्य देशों के बाजार में भी देहरादून की लीची के आसार खुल सकते हैं जिससे राजा के किसानों की आय के साथ-साथ उत्तराखंड की बागवानी अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
कृषि एवं उद्यान में मंत्री की गणेश जोशी का कहना है कि उत्तराखंड की किसान और बागवानी क्षेत्र के लिए यह एक गव की बात है राज्य सरकार के द्वारा कृषि और उद्यान उत्पादन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। यह एक फल का निर्यात नहीं बल्कि उत्तराखंड की कृषि क्षमता आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने की महत्वाकांक्षा का प्रतीक की है।यदि यह प्रयोग सफल रहा तो देहरादून की लीची अंतरराष्ट्रीय फल निर्यात पर नई पहचान दिला सकती है।
