पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, CM Dhami दी श्रद्धांजलि..

CM Dhami pay tribute to former cabinet minister : उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। बाते रविवार यानी 26 जुलाई को अधोईवाला नालापानी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया उनके बेटे सिद्धार्थ बिष्ट द्वारा उन्हें मुखाग्नि दी। वहीं इससे पहले सीएम धामी ने उनके आवास पर पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हे श्रद्धांजलि दी।

साथ ही इस मौके पर सीएम धामी ने शोक संतृप्त परिजनों से मुलाकात की और उनके प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कैबिनेट मंत्री खजान दास, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

लंबे समय से थे अस्वस्थ

जानकारी के अनुसार शनिवार की रात करीब डेढ़ बजे हीरा सिंह बिष्ट के सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उनके परिजनों द्वारा उन्हें ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहां उनका निधन हो गया। ये भी बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे। वहीं उनके निधन के बाद पूरे कांग्रेस और राजनितीक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वे सेवक आश्रम रोड पर स्थित मकान में रहते थे।

हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और तीन बार विधायक रहे एक प्रसिद्ध जननेता थे। उनका जन्म 4 नवंबर 1940 को पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। हीरा सिंह बिष्ट श्रमिक संगठनों की आवाज थे। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्रमिकों व मजदूरों के अधिकारों के लिए मुखर थे। उन्होनें पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में एक श्रमिक नेता के रूप में पहचान बनाई।

हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक सफर

हीरा सिंह बिष्ट की राजनीतिक सफर की बात करे तो बिष्ट का राजनीतिक सफर 1970 के दशक में डीएवी पीजी कालेज छात्रसंघ के अध्यक्ष से शुरू हुआ। उन्होंने कांग्रेस संगठन में लंबे समय तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाई।
सक्रिय राजनीति में उनकी शुरुआत वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव से हुई और तब उन्होंने टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। वहीं वर्ष 1985 में उन्होंने विधानसभा देहरादून सीट से चुनाव लड़ा और उप्र विधानसभा में पहुंचे। खेल गतिविधियों में विशेष रुचि रखने वाले बिष्ट ने उस समय देहरादून में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए भूमि की उपलब्धता की पहल की थी, जिस पर उत्तराखंड बनने के बाद कांग्रेस के शासनकाल में ही स्टेडियम ने आकार लिया। वहीं उत्तराखंड बनने के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में राजपुर सीट से विधानसभा पहुंचे
एनडी तिवारी सरकार में परिवहन, श्रम एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। साल 2014 में विधानसभा की डोईवाला सीट के उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद वह निरंतर विधानसभा चुनाव लड़ते रहे, लेकिन सफल नहीं हो पाए।

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