Congress has opened a front against the government: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई है। 15 अक्टूबर 2026 को प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने देहरादून में प्रदर्शन कर सरकार से सवाल किए। पार्टी ने चेतावनी दी कि न्याय की मांग को लेकर आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
Congress प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और अन्य नेताओं ने मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने मांग की कि जांच एजेंसियां संबंधित आरोपों की निष्पक्षता से पड़ताल करें और जांच की प्रगति सार्वजनिक की जाए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कहा कि अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की लड़ाई पूरे उत्तराखंड की लड़ाई है। कांग्रेस का आरोप है कि मामले से जुड़े अहम सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए हैं। हालांकि, कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर Congress का विरोध देहरादून तक सीमित नहीं रहा। रेपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राजभवन के बाहर प्रदर्शन कर ज्ञापन देने की कोशिश की। वहीं, हल्द्वानी में भी अंकिता को न्याय दिलाने की मांग के समर्थन में कैंडल मार्च निकाला गया। कांग्रेस नेताओं ने बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और मामले की निष्पक्ष जांच को प्रमुख मुद्दा बनाया। पार्टी ने संकेत दिए कि वह इस मुद्दे को लेकर आगे भी सरकार के खिलाफ राजनीतिक और जन आंदोलन जारी रखेगी।
अंकिता भंडारी मामले के साथ चंदा विवाद को भी Congress की सरकार विरोधी मुहिम के प्रमुख मुद्दों में शामिल करने की बात कही जा रही है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में चंदा विवाद के विशिष्ट आरोपों और कांग्रेस की प्रस्तावित न्याय यात्रा के कार्यक्रम की पूरी पुष्टि नहीं मिलती। ऐसे में न्याय यात्रा की तारीख, मार्ग और चंदा विवाद से संबंधित आरोपों को प्रकाशित करने से पहले पार्टी के आधिकारिक बयान से सत्यापित करना जरूरी होगा। फिलहाल अंकिता मामले को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन ने उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है।
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