DM issued instructions for a ‘surgical strike’ : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नशे और ड्रग्स के मामले बढ़ते देख देहरादून जिला प्रशासन ने युवाओं को नशे से बचाने और मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए रणनीति तैयार की है।
संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी
जिलाधिकारी ने जिला स्तरीय नारकोटिक्स को ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है। वहीं डीएम ने पुराने नशे के अपराधों के आंकड़ों का विशेषण कर नशे हॉटस्पॉट क्षेत्रो की जांच कर अभियान चलाकर तस्करों के नेटवर्क पर “Surgical Strike” करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में मौजूद डीएम आशीष चौहान ने एएनटीएफ, एसटीएफ पुलिस, एनसीबी और औषधि विभाग समेत सभी प्रवर्तन एजेंसियों को संयुक्त अभियान चलाकर ड्रग्स की सप्लाई चैन को ध्वस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही केमिकल ड्रग्स और ई ड्रग्स के बढ़ते प्रचलन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यह युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।वहीं डीएम ने पुलिस को निर्देश दिए कि तंबाकू की ठेलीयो, मेडिकल स्टोर, और स्लम बस्तियों सहित संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, और साथ ही सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
युवाओं के भविष्य और परिवारों की सुरक्षा का संकल्प
जिलाधिकारी आशीष चौहान का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और परिवारों की सुरक्षा का संकल्प भी है। सही विभागों को समन्वित और परिणाम मुख्य कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
युवाओं में बढ़ते नशे को देख डीएम ने स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित पाठ्यक्रम के साथ एंटी ड्रग्स,साइबर अपराध और वित्तीय अपराध से जुड़े विषयों को शामिल करने को भी कहा। वही पीजी कोचिंग संस्थानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने और एंटी ड्रग्स हेल्प 1933 का प्रचार प्रसार करने को भी लागू किया। नशा मुक्ति और पुनर्वास केद्रो का नियमित निरीक्षण करने और मानकों का उल्लंघन मिलने पर केद्रो को तत्काल सील कर दिया जाएगा।इसके अलावा सेलाकुई में 30 बेड क्षमता वाले नए नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र की स्थापना के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्देश भी दिया है।
