IDBI and public sector banks participate in forex inflows meeting : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार 13 जुलाई को देश के सभी सरकारी बैंकों और IDBI बैंक के प्रमुखों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। बताया जा रहा है की बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाहन को बढ़ाना और सरकारी बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के कामों की समीक्षा करना है।
आपको बता दे कि यह बैठक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पिछले महीने ही घोषित की गई थी जिसके बाद बड़े फैसलों पर रिजर्व बैंक ने प्रवासी भारतीयों और विदेशी भारतीय नागरिकों को भारत में पैसा जमा करने के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से कई बड़े बदलाव किए हैं।
बैठक में मुख्य रूप से तीन चीजों पर चर्चा की जाएगी
- FCNRB डिपॉजिट विदेशी मुद्रा गैर निवासी खातों में आने वाले पैसे
- विदेशी बॉन्ड सरकारी बैंकों द्वारा विदेशों में फंड जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले बॉन्ड
- ईसीबी भारतीय कंपनियों और सरकारी कंपनियों द्वारा विदेशी बाजारों से लिया जाने वाला कर्ज।
साथ ही बैंकों को विदेशी मुद्रा जताने में मदद करने के लिए आरबीआई ने 30 सितंबर तक के लिए दो बड़ी राहत दी है जिसमें आरबीआई ने तीन से पांच साल की अवधि वाले नए एफसीएनआरबी डिपॉजिट पर लगे ब्याज दरों की अधिकतम सीमा को अस्थाई रूप से हटा दिया है।जिससे अब भारतीय बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को ज्यादा ब्याज दर ऑफर कर पा रहे हैं।
बैंकिंग अधिकारियों का मानना है
डॉलर और रुपए की उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बैंकों को बचाने के लिए आरबीआई ने रियायत दरों पर फॉरेक्स स्वैप की सुविधा दी है इसी ही सस्ती सुविधा सरकारी कंपनियों को विदेश से कर्ज लेने के लिए भी दी गई है।बैंकिंग अधिकारियों का मानना है
बैंकिंग सूत्रों और एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार नई रियायतों के बाद बैंकों को काफी अच्छा रिस्पांस भी मिल रहा है वही 3 जुलाई तक बैंकों ने एफसीएनआरबी के जरिए करीब 3 से 4 अरब डॉलर की रकम जुटा ली है।
साथ ही बैंकिंग अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में खासकर खाड़ी देशों में रहने वाली प्रवासी भारतीयों की तरफ से इस निवेश में और तेजी आएगी।और बैंकिंग विशेषज्ञों का अनुमान यह भी है कि नई योजना की मदद से आने वाले समय में देश में 40 से 50 अरब डॉलर का नया विदेशी निवेश आ सकता है जिससे भारतीय रुपए को मजबूती मिलेगी।
