MEA has been implemented in UK : पिछले वर्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने अगस्त 2025 में विधानसभा में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान विधेयक पेश कर पास कराया था।जिसके चलते अक्टूबर 2025 में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने इस बिल को अपनी अंतिम मजबूरी दी जिसके बाद यह कानून बन गया।
30 जून 2026 यानी मंगलवार को उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो गया है इसके साथ 1 जुलाई से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Minority Education Authority) लागू हो गया है।ऐसे में अब प्रदेश में संचालित 452 मदरसा को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। अभी करीब 400 मदरसा पहली से आठवीं कक्षा तक और 55 मदरसे नौवीं से 12वीं कक्षा तक संचालित हो रहे हैं।
इस कानून के चलते मदरसो को संभालने के लिए उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया है जो मुस्लिम समाज के साथ-साथ सिख ,इसाई ,जैन ,बौद्ध और पारसी स्कूलों को भी रेगुलेट करेंगे। उत्तराखंड में मौजूद मदरसो के लिए बड़ी चुनौती यही है कि मदरसे के पास अपनी कोई जमीन नहीं है और ऐसे में मदरसे मदरसा बोर्ड की संपत्ति की संचालित हो रहे हैं ऐसे में इन मदरसो को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेने में तमाम दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें मदरसो को मान्यता मिलेगी जो मदरसे उत्तराखंड शिक्षा विभाग के मानकों के अनुरूप होंगे।
UK Board सिलेबस अल्पसंख्यक स्कूलों में भी लागू
विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के लिए यह नई व्यवस्था बनाई गई है। उत्तराखंड शिक्षा विभाग (UK Board) का सिलेबस अल्पसंख्यक स्कूलों में भी लागू होगा इन सिलेब्स के साथ ही यह बच्चे अपने धार्मिक शिक्षा को भी ग्रहण करेंगे।
साथ ही उत्तराखंड शिक्षा विभाग की ओर से जो शिक्षा बिल्डिंग और प्रशंसनिक मानक तय किए गए हैं। उन मानकों का सभी शैक्षणिक संस्थाओं को पूरा करना होगा,जिसके बाद सभी शैक्षणिक संस्थाओं को मान्यता दी जाएगी। इस पहल से उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य है कि जितने भी अल्पसंख्यकों के बच्चे हैं उनको उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के मुख्य धारा में शामिल करना है। ऐसे में अल्पसंख्यकों से उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में शामिल होने के साथ ही अपनी धार्मिक शिक्षा को भी ग्रहण कर सकेंगे।
आपको बता दे उत्तराखंड राज्य देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है।जिसने इस प्रक्रिया को अपनाया है यह सभी व्यवस्थाएं संविधान के अनुरूप की गई है।
