प्रशासन के साथ वार्ता के बाद,अपनी यात्रा पर लौटे निहंग….

talks with the administration, the Nihangs returned to pilgrimage : हाल ही में नगरासू और कर्णप्रयाग गुरुद्वारा विवाद को लेकर निहंग सिखों और उत्तराखंड पुलिस के बीच चल रहा तनाव खत्म हो गया था और शुक्रवार सुबह निहंग वापस लौट गए।

जिसके बाद कुछ निहंगों ने पहले से ही 25 जून को पंजाब और हिमाचल से उत्तराखंड की तरफ कूच करने का ऐलान किया।जिसका कारण करणप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारे में हुआ विवाद बताया जा रहा है जिसमें पुलिस ने चार निहगो को गिरफ्तार किया था।इसी विरोध में निहंगों का जत्था हिमाचल, उत्तराखंड बॉर्डर पर मौजूद कुल्हाल चेक पोस्ट पर पहुंचा। पांवटा साहिब में प्रशासन मामला सुलझाने की बातचीत हुई लेकिन निहंगों को रोकने पर सहमति नहीं बनी और आगे बढ़े।

साथ ही निहंगों का कहना है कि उनका मकसद टकराव या कानून व्यवस्था बिगाड़ना नहीं है बल्कि शांति से हेमकुंड साहिब की यात्रा करना और गिरफ्तार साथियों की जमानत करवाना है। इसके बाद लगभग 50 निहंग बाइक से देहरादून की तरफ बढ़े और डेढ़ सौ निहंग पांवटा साहिब व अलग अलग जगहों पर लौट गए।

देहरादून बॉर्डर पर पहुंचने से पहले ही प्रेम नगर इलाके में पुलिस ने पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया लेकिन निहंगों ने पुलिस को चकमा देकर ऋषिकेश की ओर रुख मोडा। इसके बाद वहां हड़कंप मच गया और करीब रात 12:00 बजे जोगीवाला चेक पोस्ट पर देहरादून ऋषिकेश हाईवे समेत कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई जिससे शहर में घंटों लंबा जाम लगा रहा।

बताया जा रहा है कि निहंगों का जोगीवाला पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें वहीं से वापिस भेजा जिसके बाद जत्था शहर में तीतर बीतर हो गया। साथ ही कुछ निहांगो को रेस कोर्स गुरुद्वारे में ठहराया जहां भारी पुलिस फोर्स तैनात थी। बता दे जिला प्रशासन पुलिस अधिकारियों और सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच रात भर बात चली, जिसके चलते सुबह 3:30 बजे निहंग वापस पोंटा साहिब लौटने पर सहमत हुए।

वहीं वार्ता में शामिल कांग्रेस नेता और सिख समाज की प्रतिनिधि अमरजीत सिंह ने बताया कि निहंगों का मकसद उन्माद फहराना नहीं था बल्कि शांतिपूर्ण समाधान निकालना था। साथ ही उन्होंने कहा यह कभी पहाड़ और सिख समाज की लड़ाई नहीं थी बल्कि दोनों तरफ से बयानबाजी हो गई। डीएम आशीष चौहान और एएसपी प्रमोद डोभाल ने कहा कि पूरी मामले को शांति से संभाला गया और कानून व्यवस्था नियंत्रण में रही।

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