Thousands of trees are cutting down : उत्तराखंड में एक बार फिर से विकास के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि दी जा रही है। राजधानी देहरादून के भानियावाला क्षेत्र से ऋषिकेश तक करीब 20 किमी लबें हाईवे का चौड़ीकरण फोर और सिक्स लेन में किया जाना है, जिसके लिए करीब तीन हजार पेड़ों को कटा जा रहा है। वहीं इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने पर स्थानीय लोंगो के साथ कई सामाजिक संगठन भी इसका विरोध कर रहे है। उनका मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान से पर्यावरण पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
20 किमी लंबे हाईवे का किया जाना है चौड़ीकरण
बता दे भानियावाला क्षेत्र से ऋषिकेश के बीच ट्रैफिक के बढ़ते दवाब को देखते हुए NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) द्वारा हाईवे का चौड़ीकरण किया जा रहा हैं। 20 किमी लंबे इस हाईवे का चौड़ीकरण करीब 743 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मॉडल से किया जाएगा। इस हाईवे के फोर और सिक्स लेन बनने से न सिर्फ देहरादून शहर से जौलीग्रांट एयरपोर्ट की राह आसान होगी, बल्कि ऋषिकेश जाने वाले लोगों के समय की भी बचत होगी।
वहीं फोरलेन निर्माण के लिए पेड़ों के कटान के विरोध में बुधवार शाम करीब 4 बजे स्थानीय लोंगो ने और पर्यावरण प्रेमियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में नारेबाजी की और साथ ही जनगीतों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।
पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि देहरादून और ऋषिकेश के बीच यातायात की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सड़क को चौड़ा करने की कोई विशेष आवश्यकता दिखाई नहीं देती। उनका कहना था कि जब इस मार्ग पर नियमित रूप से गंभीर जाम की स्थिति नहीं बनती, ऐसे में हजारों परिपक्व पेड़ों की कटाई उचित नहीं ठहराई जा सकती।
पर्यावरण प्रेमी अनूप नौटियाल का कहना है कि विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले निर्णयों पर पुनर्विचार होना चाहिए। इस हाईवे को चौड़ा करने की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है। पर्यावरण कार्यकर्ता हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि यह क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक आवास और आवाजाही का महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 के मधुमलाई फैसले में हाथी कॉरिडोर के संरक्षण पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। ऐसे में पेड़ों की कटाई में जल्दबाजी उचित नहीं है। पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी कि उनका आंदोलन जारी रहेगा।
