WHO warning regarding increasing incidence of cancer : दुनिया भर में हेल्थ सबसे बड़ी चुनौती में से एक है खास तौर पर मेडिकल फील्ड में तरक्की के बावजूद कैंसर जैसी बीमारी का नाम सुनते ही लोगों में डर और चिंता पैदा होता है। इसी को देखते हुए दुनिया भर में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर एक चेतावनी जारी की है कैंसर की ग्लोबल स्थिति पर अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक WHO ने जारी किया कि अगर देश तुरंत कदम नहीं उठाता है।तो 2050 तक कैंसर के नए मामलों की सालाना संख्या लगभग 35 मिलियन तक पहुंचने की आशंका हो सकती है।
WHO : बेहतर रोकथाम शुरुआती पहचान
हर साल कैंसर के लगभग 20.6 मिलियन नए मामले सामने आते हैं, और कैंसर से लगभग 10 मिलियन लोगों की मौत भी होती है। वही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर कैंसर पहले से ही दुनिया भर में मौत का सबसे बड़ा कारण है तो इससे पता चलता है कि यह बीमारी न सिर्फ व्यक्ति को शारीरिक रूप से प्रभावित करती है बल्कि पूरी परिवार को आर्थिक और भावनात्मक रूप से भी बर्बाद कर देती है। मेडिकल साइंस कैंसर को रोकने और उसे सही तरीके से रोकथाम करने में काफी तरक्की कर रहा है फिर भी कम और मध्य आय वाले देशों के लोगों को समय पर जांच दवा और सही इलाज पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जिस पर WHO का मानना है की बेहतर रोकथाम शुरुआती पहचान और अच्छी देखभाल से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है लेकिन सरकारों को इंतजार करने के बजाय अभी कदम उठाने की जरूरत है।
वही WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस का कहना है कि कैंसर एक निजी बीमारी है जो लगभग किसी न किसी को प्रभावित करती है अगर किसी व्यक्ति का जीवित रहना इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि वह कहां पैदा हुआ है या उसकी आय क्या है उन्होंने रहने की जगह के आधार पर कैंसर के इलाज में भारी असमानताओं को लेकर चिंता जताई है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह समानताएं अनिवार्य नहीं है बल्कि नीतिगत फैसलों का नतीजा है जिन्हें ठोस और सामूहिक प्रयासों से बदला जा सकता है।
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक हर किसी के पास कैंसर से बचने का मौका नहीं होता है जैसे अमीर देश में रहने वाले लोगों की पास अक्सर स्क्रीनिंग प्रोग्राम, एडवांस ट्रीटमेंट और स्पेशलिस्ट डॉ जैसी बेहतर पहुंच होती है वही कम इनकम वाले देशों को बीमारी का पता ही बाद में चलता है जिसके बाद ट्रीटमेंट और भी मुश्किल और महंगा हो जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया कि कई देश अभी भी उन सभी लोगों को जरूरी कैंसर की दवाइयां या रेडिएशन थेरेपी देने में नाकाम है जिनकी उन्हें जरूरत होती है। ट्रीटमेंट का ज्यादा खर्चा कई परिवारों को केयर में देरी या उसे बंद करने पर मजबूर करता है जिससे हेल्थ में असमानताएं और बढ़ जाती है।
WHO की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की डॉ एलिजाबेट विंडरपास का कहना है हम उन देशों में कुछ कैंसर रेट में कमी देख रहे हैं जहां रोकथाम की पॉलिसी लागू की गई है लेकिन प्रोग्रेस बहुत धीमी रही है। कैंसर का प्रोफाइल बदल रहा है मोटापा ,फिजिकल इन एक्टिविटी ,अनहेल्दी डाइट और एयर पॉल्यूशन की बढ़ती दरों के कारण मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए कैंसर की रोकथाम एक पॉलिटिकल प्रायोरिटी बनी रहनी चाहिए।
कैंसर मामलों में बढ़ोतरी के कारण
WHO का कहना है कि अगले 25 सालों में कैंसर की सालाना मामले लगभग 70% बढ़ सकते हैं अगले 25 सालों में कैंसर के मामलों में 70 फिसदी बढ़ोतरी होने के कई कारण है
- आबादी बढ़ाना और बुढ़ापा
- तंबाकू का इस्तेमाल
- लाइफस्टाइल में बदलाव
- शराब पीना
- पर्यावरण और वायु प्रदूषण
- रोके जा सकने वाले संक्रमण
कैंसर से बचाव
- तंबाकू पर नियंत्रण हेपेटाइटिस बी और HPV तक उपलब्ध कराना स्वास्थ्य खान-पान वह व्यायाम को बढ़ावा देना
- ब्रेस्ट ,सर्वाइकल और कोलोन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता चलने पर पूरी तरह इलाज किया जा रहा सरकारों को इन मकसद के लिए जांच कैंपों की संख्या बढ़ाना।
- देश को अपने हेल्थ केयर सिस्टम को मजबूत करना और अच्छा इलाज जरूरी दवाई और सहायक देखभाल मिलना।
