Chinese President may visit India : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने 12 और 13 सितंबर 2026 को करीब 400 अधिकारियों के बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आ सकते है। हालांकि शी जिनपिंग के आने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार चीनी अधिकारी होटल और सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
बता दे चीनी राष्ट्रपति का यह दौरा पूरे सात साल बाद होने जा रहा है। वे आखिरी बार अक्टूबर 2019 में चेन्नई के पास महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन (Informal Summit) के लिए भारत आए थे। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस बार शी जिनपिंग के साथ करीब 400 चीनी अधिकारियों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। यह 2019 की तुलना में काफी बड़ा दल होगा। 2019 में शी के साथ भारत आने वाले अधिकारियों की संख्या 200 से कम थी।
2020 में गलवान घाटी में हुई थी दोनो देशों के बीच झड़प
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा 2020 की सीमा झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। साल 2020 के मई-जून में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। गलवान घाटी में हुई उस झड़प में 20 भारतीय और चार चीनी सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच करीब चार साल तक गतिरोध बना रहा। दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए और सीमा पर भारी सैन्य तैनाती कर दी गई।
वहीं साल 2023 में जब भारत ने नई दिल्ली में जी20 (G20) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब भी शी जिनपिंग भारत नहीं आए थे। उनकी जगह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने इस समिट में हिस्सा लिया था। वहीं अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच पहली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। जिसके बाद दोनों देशों ने एलएसी (LAC) पर गश्त (patrolling) को लेकर समझौता किया।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और चीन के अधिकारी ब्रिक्स सम्मेलन का इस्तेमाल लंबे समय से चले आ रहे सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी मतभेदों को संभालने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने के रास्ते तलाशने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, शी की यात्रा की अंतिम योजना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक का एजेंडा अभी तय नहीं हुआ है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों नेताओं की मुलाकात होने पर किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होगी।
