NAI के महासचिव डॉ. विपिन गौर ने नैरोबी में पत्रकार कल्याण सम्मेलन में की शिरकत, मीडिया की चुनौतियों पर की चर्चा।

NAI General Secretary Dr. Vipin Gaur participated: न्यूजपेपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NAI) के महासचिव डॉ. विपिन गौर ने केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित पत्रकार कल्याण पर राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने केन्या के मीडिया पेशेवरों और विभिन्न मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया तथा पत्रकारों के सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. गौर को इस सम्मेलन में टॉक अफ्रीका की संपादक एवं डेटा पत्रकार तथा केन्या के एसोसिएशन ऑफ फ्रीलांस जर्नलिस्ट्स (AFJ) की अध्यक्ष विनी कामाऊ ने आमंत्रित किया था।

सम्मेलन में पत्रकारों को कम वेतन, नौकरी की असुरक्षा, लगातार बढ़ते कार्यभार और पेशेवर सहयोग की कमी जैसी समस्याओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना स्वतंत्र एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए बेहद जरूरी है।

सर्वे में सामने आई केन्याई पत्रकारों की आर्थिक चुनौतियां

सम्मेलन में केन्या यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (KUJ) और मीडिया काउंसिल ऑफ केन्या (MCK) के सहयोग से प्रकाशित स्टेट ऑफ जर्नलिस्ट्स वेलफेयर सर्वे के निष्कर्ष भी प्रस्तुत किए गए। 120 मीडिया पेशेवरों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित इस सर्वे में पत्रकारों की आर्थिक स्थिति और कार्य परिस्थितियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

सर्वे के अनुसार, प्रतिभागियों की औसत मासिक आय 63,000 केन्याई शिलिंग (KES) थी, जबकि 52 प्रतिशत पत्रकारों की मासिक आय 50,000 केन्याई शिलिंग से कम थी। करीब 48 प्रतिशत पत्रकारों को तीन वर्षों से अधिक समय से वेतन में संशोधन नहीं मिला था, जबकि 82 प्रतिशत को किसी प्रकार का भत्ता या बोनस नहीं दिया जा रहा था।

सर्वे में यह भी सामने आया कि 55 प्रतिशत पत्रकार नौकरी की सुरक्षा के बिना काम कर रहे हैं। वहीं, 65 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में उनका कार्यभार बढ़ा है, लेकिन इसके अनुपात में उनके वेतन में वृद्धि नहीं हुई है।

पत्रकारों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ती चिंता, पेशा छोड़ने का भी बना रहे विचार

सर्वे में पत्रकारों के मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर भविष्य को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आईं। लगभग 65 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अवसाद से जुड़े लक्षणों का अनुभव होने की बात कही, जबकि केवल 25 प्रतिशत ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए पेशेवर सहायता ली थी।इसके अलावा, 89 प्रतिशत पत्रकार अपने मौजूदा कार्यस्थल से बाहर रोजगार के अवसर तलाश रहे थे। वहीं, लगभग एक-तिहाई पत्रकारों ने पत्रकारिता का पेशा पूरी तरह छोड़ने पर विचार करने की बात कही।

सम्मेलन में KUJ के महासचिव एरिक ओडुओर ने कहा कि पत्रकारों का कल्याण सीधे तौर पर उनकी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली भूमिका को प्रभावित करता है। MCK के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड ओम्वोयो ने सर्वे के महत्व को रेखांकित किया।वहीं, प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुसान मंग’एनी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स अथॉरिटी (RBA) के प्रतिनिधि जेम्स राटेमो ने पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा और समय रहते बचत शुरू करने के महत्व पर अपने विचार रखे।

रिटायरमेंट बेनिफिट्स अथॉरिटी ने KUJ को गैर-स्थायी पत्रकारों, फ्रीलांसरों और संवाददाताओं के लिए प्रेस पेंशन योजना स्थापित करने में सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

भारतीय पत्रकारों की चुनौतियां भी केन्या जैसी : डॉ. विपिन गौर

केन्या के विभिन्न पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के दौरान डॉ. विपिन गौर ने कहा कि सम्मेलन में उठाए गए कई मुद्दे भारत के पत्रकारों के लिए भी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी पत्रकार कम वेतन, रोजगार की अनिश्चितता, बढ़ते कार्यभार और पेशेवर सुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।उन्होंने न्यूजपेपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NAI) की ओर से पत्रकारों की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यक्रमों एवं पहलों की जानकारी साझा की।

डॉ. गौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के मीडिया क्षेत्र में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे पत्रकारों के लिए विभिन्न सुविधाओं और सहयोग के अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिससे मीडिया उद्योग मजबूत हो और पत्रकारों की पेशेवर एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो।

भारत में पत्रकार सुरक्षा कानून बनना ऐतिहासिक कदम होगा : डॉ. विपिन गौर

पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर डॉ. विपिन गौर ने कहा कि भारत में पत्रकार सुरक्षा कानून का लागू होना मीडिया जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि सरकार देश के मीडिया क्षेत्र और पत्रकारों के हित में आवश्यक कदम उठाएगी।

डॉ. गौर की नैरोबी सम्मेलन में भागीदारी ने भारतीय और केन्याई पत्रकार संगठनों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, बेहतर कार्य परिस्थितियों और पेशेवर संरक्षण के लिए पत्रकार संगठनों, मीडिया संस्थानों तथा सरकारी निकायों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।

Aarti Rawat
Aarti Rawat