Chamoli : “बेस नहीं तो वोट नहीं” सिमली बेस हॉस्पिटल के लिए 200 किमी की पैदल यात्रा…

A 200 km walk for Simli Base Hospital : विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले, उत्तराखंड के चमोली जिले की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। लेकिन इस बार चुनाव से पहले पार्टी को अपनों के ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

बता दे क्षेत्र में लंबे समय से लंबित सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण दर्जा देने, नैनीसैंण क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती और सरकार की अधूरी घोषणाओं को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिसके बाद ग्रामीणों ने अब सीधे सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित करने की मांग को लेकर सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

200 km पैदल यात्रा कर सीएम आवास का करेंगे घेराव

“बेस नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ ग्रामीणों और भारी संख्या में महिलाओं ने सिमली से देहरादून तक 200 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा शुरू कर दी है। यह आंदोलनकारी प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की योजना 20 अक्टूबर 2026 को राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की है।

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति का कहना है कि अस्पताल की बिल्डिंग बने हुए करीब 12 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसे अब तक पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं (जैसे विशेषज्ञ डॉक्टर, मशीनें और जांच सुविधाएं) नहीं मिल पाई हैं। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 नवंबर 2024 को गैरसैंण से इसे पूर्ण दर्जा देने की घोषणा की थी, लेकिन लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इसके लिए सरकारी शासनादेश (GO) जारी नहीं हुआ है।

वहीं नैनीसैंण और आस-पास के क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। पहाड़ों से हो रहे पलायन का एक बड़ा कारण शिक्षा का यह स्तर है, जिसे लेकर युवाओं और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।

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Aarti Rawat
Aarti Rawat