America ने भारतीय सामान पर लगाया 10% शुल्क, कपड़ा निर्यात पर $11 अरब नुकसान की संभावना…

America imposed 10% Tax on Indian goods : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर एक बार चर्चाओं में है जहां उन्होंने भारत सहित 17 देशो से आने वाले सामान पर 10% आयात शुल्क लगा दिया है। इस फैसले से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे होने की आशंका है हालांकि भारतीय निर्यातकों का कहना है कि हमें केवल 10% टैक्स को नहीं देखना चाहिए बल्कि यह भी देखना चाहिए कि हमारे प्रतिद्वंदी देश पर कितना टैक्स लगाया जा रहा है।

भारत के लिए राहत की बात….

एक्सपोर्टर संस्था FIEO के अध्यक्ष रल्हन ने बताया कि भारत के लिए राहत की बात यह है कि भारत को और देशों से कम यानी 10% वाले स्लैब में रखा गया है इसके विपरीत भारत के बड़े प्रतिस्पर्धी देशों जैसे चीन,वियतनाम,थाईलैंड, तुर्की, यूएई, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका पर 12.5% का टैक्स लागत किया गया है। जिससे वैश्विक बाजार में भारत कई देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रहेगा।

कपड़ा ,चमड़ा और जूते ,चप्पल जैसी चीजों में भारत सीधे मुकाबले वाले देशों जैसे पाकिस्तान और श्रीलंका पर भी 10 % टैक्स की लागत की गई है। इसलिए इन सेक्टर में भारतीय निर्यातकों की पकड़ कमजोर नहीं देखने को मिलेगी, क्योंकि प्रतिस्पर्धियों को भी अमेरिका में बराबर का टैक्स देना होगा। FIEO ने व्यापारियों को सलाह दी कि वह घबराए बिना अपने-अपने प्रोडक्ट के हिसाब से अमेरिकी नियमों का बारीकी से अध्ययन करें।

चाहे भारत को कम टैक्स वाले ब्रैकेट में रखा गया हो लेकिन कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा संकट नजर आ रहा हैं।अमेरिका ने भारत के पड़ोसी और सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी देश बांग्लादेश के साथ-साथ कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया को एक विशेष छूट दी है जिसके तहत अगर यह देश अमेरिका से कपास खरीद कर कपड़ा बनाते हैं, तो वह बिना अतिरिक्त टैक्स के अपना माल अमेरिका में बेच सकते हैं।

भारत विशेष टैक्स छूट की लिस्ट से बाहर…

थिंक टैंक मंत्री के मुताबिक भारत को इस विशेष टैक्स छूट की लिस्ट से बाहर रखा गया है। क्योंकि कपड़ा उद्योग की बड़ी संस्था सिटी के अध्यक्ष अश्विन चंद्र ने इस पर गहरी चिंता जताई और उन्होंने कहा कि टैक्स लगाने के लिए जबरन श्रम का मुद्दा उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है इससे भारतीय उत्पादों की साख खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है।

जिसमें सबसे बड़ी समस्या बांग्लादेश जैसे देश जो अब तक कपड़ा बनाने के लिए भारतीय से भारी मात्रा में कपास और सूत खरीदते थे।अब अमेरिका से टैक्स छूट मिलने के कारण वह भारत की जगह अमेरिका से कपास खरीदना शुरू कर सकते हैं जिससे भारत के कपास किसानों और सूत मिलों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

$11 अरब नुकसान की संभावना..

वहीं भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है।हर साल भारत अमेरिका को करीब 11 अरब डॉलर का कपड़ा और तैयार कपड़े निर्यात करता है। जिसमें विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की नई नीति से कई अमेरिकी कंपनियां भारत को मिलने वाले ऑर्डर कंबोडिया या बांग्लादेश जैसे देशों को दे सकती है।

हालांकि भारत सरकार इस स्थिति को संभालने में जुटी हुई है वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पहले उम्मीद जताई थी कि भारत भी अमेरिकी धागे और कपास का इस्तेमाल करके बनाए गए कपड़ों के लिए अमेरिका से रियायती दर पर व्यापार समझौता कर लेगा। लेकिन भारतीय निर्यातकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही बातचीत के जरिए इस समस्या का कोई सकारात्मक समाधान निकाल ही लेगी।

Srishti
Srishti