चमोली को सीड हब के रूप में किया जाएगा विकसित, कृषि क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

Chamoli will Developed as a Seed Hub : उत्तराखंड में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने पर जोर दिया जा रहा है। जिसके लिए राज्य सरकार पहाड़ों की पारंपरिक खेती को मजबूत करने और किसानों की आय को बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण योजना पर काम कर रही है, योजना के तहत चमोली जिले को “सीड हब” के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस पहल का मुख्य फोकस बीजों की गुणवत्ता सुधारने फसलों के उत्पादकता बढ़ाने और खास तौर पर मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने पर विशेष जोर दिया जा रहा है इनमें लाल चावल, पहाड़ी राजमा, चौलाई और रामदाना जैसे फैसले शामिल है, जो पोषण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हाल के वर्षों में मिलेट्स की मांग देश-विदेश दोनों जगह तेजी से बड़ी है, खास कर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच इसकी मांग बड़ी है। ऐसे में उत्तराखंड के पारंपरिक मिलेट्स उत्पादन के लिए बड़ा बाजार तैयार हो सकता है।

पर्वतीय जिलों में उगने वाले पारंपरिक बीजों को संरक्षित किया जाएगा

ग्रामीण विकास विभाग की इस परियोजना के तहत पर्वतीय जिलों में उगने वाले पारंपरिक बीजों को संरक्षित करने के साथ-साथ उनका वैज्ञानिक तरीके से आदान-प्रदान भी किया जाएगा। बता दे लंबे समय से यह समस्या सामने आई रही है कि एक क्षेत्र में उत्पादित बीजों का प्रयोग उसी क्षेत्र तक सीमित रह जाता है, जिससे बीजों के गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होती जा रही है, इस चुनौती को दूर करने के लिए अब राज्य सरकार ने एक संगठित और योजनाबद्घ प्रयास शुरू किया है।

उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का संग्रह किया जाएगा

इस योजना का केंद्र चमोली जिला रखा गया है, जहां मिलेट्स और अन्य पारंपरिक फसलों का उत्पादन पहले से बेहतर माना जाता है। यहां से उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का संग्रह किया जाएगा और फिर उन्हें रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा,और बागेश्वर जैसे अन्य पर्वतीय जिलों में भेजा जाएगा। इसी तरह इन जिलों से भी स्थानीय स्तर पर उत्पादित बीजों को चमोली समेत अन्य क्षेत्र में भेजा जाएगा। इस पारंपरिक आदान- प्रदान से बीजों की विविधता बढ़ेगी और उनकी उत्पादकता में भी सुधार होगा।

इस परियोजना के तहत करीब एक हजार ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा यह परिवार अपने-अपने क्षेत्र में उगने वाले प्रमुख फसलों के बीजों का संग्रह करेंगे और उन्हें संरक्षित करने में भूमिका निभाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

सरकार की यह योजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की भी है। इसके लिए बीजों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने और स्ट सर्टिफिकेट प्रक्रिया को मजबूत करने का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Srishti
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