Dhan Singh Rawat : ताराकुंड दर्शन करने पहुंचे, मंदिर और झील बनेगा आस्था और पर्यटन का नया केंद्र…

Dhan Singh Rawat visited Tarakund : उत्तराखंड दुनिया भर में अपनी आलोकिक खूबसूरती, देवों के गोद में बसी धरती और प्राकृतिक सौर्दय के लिए जाना जाता है। देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड में अनेकों देवी-देवताओं के मंदिर है जिनकी अपनी मान्यताएं हैं। राज्य के कोने- कोने में भगवान बिराजमान है जो अपनी आलौकिक शक्तियों के साथ मौजूद है। यही वजह है कि उत्तराखंड को देवभूमि का दर्जा मिला है। ऐसी ही कुछ मान्यताओं को समेटा हुआ है ताराकुंड महादेव मंदिर ने जो पौड़ी जिले में स्थित है। यह मंदिर एक कुंड यानी झील के किनारे है। इस कुंड और मंदिर को लेकर भी अपनी मान्यताएं हैं।

पदयात्रा कर ताराकुंड पहुंचे मंत्री Dhan Singh Rawat

वहीं, अब इस ताराकुंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है। पौड़ी के इस पौराणिक स्थल को धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है। जिसके तहत मंत्री धन सिंह रावत और सैकड़ों ग्रामीण पदयात्रा कर ताराकुंड पहुंचे। जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और इस दौरान उन्होंने मां तारा का भव्य मंदिर निर्माण, झील का सौंदर्यीकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को विकसित करने की बात कही। मंत्री धन सिंह ने भरोसा दिलाया कि इस पौराणिक स्थल को विकसित करने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में समुद्र तल से करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ताराकुंड एक खूबसूरत और शांत प्राकृतिक झील है। जो लोगों के आकर्षण का केंद्र है। ऊंचे पहाड़, हरियाली और जंगलों के बीच मौजूद छोटी झील और प्राचीन मंदिर इस स्थान की पहचान है। इसी प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक पहचान के कारण मंत्री धन सिंह रावत ने इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही है।

कैबिनेट मंत्री (Dhan Singh Rawat) ने ताराकुंड को धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन सर्किट से जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही है। प्रस्तावित सर्किट में बुंखाल मंदिर, पैठाणी स्थित राहु मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, देवलगढ़ के राजराजेश्वरी देवी मंदिर, कमलेश्वर महादेव मंदिर और मां धारी देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों को शामिल करने की पहल की जाएगी।

इन स्थलों की अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है। इन्हें बेहतर रोड कनेक्टिविटी, यात्री सुविधाओं, सूचना संकेतकों और स्थानीय पर्यटन सेवाओं के माध्यम से आपस में जोड़ने से श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन करने का अवसर मिल सकता है। इससे आस पास के गांवों में रोजगार, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और होमस्टे जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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Aarti Rawat
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