उत्तराखंड में फिर होगी Dharali जैसी आपदा, 49 जगह चिन्हित, 11 हाई रिस्क जोन घोषित

Dharali alike Disaster Awaits In Uttarakhand: उत्तराखंड में फिर एक बार धराली जैसी प्राकृतिक आपदा का संकट मंडरा रहा है। जिसको लेकर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य के सीमांत पर्वतीय क्षेत्र में मलबे के बहाव का खतरा जताया है। जिओ स्पेशल मैपिंग और मैदानी आकलन की जानकारी पर उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले में कुल 49 ऐसे स्थान की लिस्ट बनाई है, जहां आने वाले समय में मलबे के तेज बहाव से भारी तबाही की आशंका है। इनमें से 11 हाई रिस्क जोन भी घोषित है।

चमोली (कुल 22 स्थान)
  • हाई रिस्क (4): हनुमान चट्टी, जालम्, पुलना और घस्तोली।
  • मीडियम रिस्क (14): चाई जोशीमठ, पांडुकेश्वर, घांघरियां, बदरीनाथ, मलारी, मंडल, द्रोणागिरी आदि।
  • लो रिस्क (4): मलकोट, धुनार घाट, त्रिकोट और गौचर।
पिथौरागढ़ (कुल 16 स्थान):
  • हाई रिस्क (6): सोबला, दाफा, सुवा, सुंडुंग, धुनापानी और गलाती।
  • मीडियम रिस्क (9): बारम, मडकोट, नाभी, माल्या आदि।
  • लो रिस्क (1): टांगा।
उत्तरकाशी (कुल 11 स्थान):
  • हाई रिस्क (1): स्यानाचट्टी।
  • मीडियम रिस्क (7): जानकीचट्टी, हर्षिल, झाला, गंगोरी आदि।
  • लो रिस्क (3): कथोनर, खरसाली और गंगोत्री।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के द्वारा किए गए अध्ययन में क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पुरानी भूस्खलन के निशान, ग्लेशियर, ड्रेनेज चैनल और वहां मौजूद आबादी और सड़कों की बारीकी से जांच की गई है। विभाग के द्वारा चिन्हित किए गए 49 संवेदनशील स्थानों में से 11 को हाई रिस्क, 30 को मीडियम रिस्क और 8 स्थान को लो रिस्क कैटेगरी में रखा गया है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद सुमन ने बताया कि डीएम को इन चिन्हित स्थानों पर धरातलीय स्थिति की जांच करने और जोखिम कम करने की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के बाद शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग के द्वारा जारी की गई रिपोर्ट से सबसे ज्यादा चिंता चार धाम यात्रा और राष्ट्रीय राजमार्गों पर जताई गई है। रिपोर्ट के अनसार कई हाई रिस्क जोन सीधे तौर पर बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम जाने वाले मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों और स्थानीय बस्तियों के ऊपर स्थित है जिससे चार धाम यात्रा पर संकट बन रहा है।

  • ओथ गांव व हनुमान चट्टी: यहां टो-इरोज़न (नदी के कटाव) से पुलों के ढहने और भूस्खलन का सीधा खतरा है, जो बदरीनाथ यात्रा को ठप कर सकता है।
  • पटुरी गांव: पहाड़ी पर जमा मोरेन (हिमोढ़) का मलबा सीधे नीचे बसे गांव और अलकनंदा नदी की ओर बहकर आ सकता है। इससे गंभीर खतरा बन सकता है।
  • स्यानाचट्टी: उत्तरकाशी का यह पड़ाव हाई-रिस्क श्रेणी में है, जहां मलबे का बहाव आबादी और एनएच कॉरिडोर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

Srishti
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