Now blowing horn loudly will cost you heavily: सड़कों पर दौड़ती बाइकें जो पटाखे की आवाज़ करती हैं, कारों के हॉर्न जो गानों की धुन बजाते हैं या जानवरों की आवाज़ निकालते हैं। अब यह सब उत्तराखंड में नहीं चलेगा। परिवहन विभाग ने ध्वनि प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
आपको बता दें, राज्य में अब ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो नियमों की अनदेखी करते हुए तेज आवाज़ वाले हॉर्न या मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे मामलों में 10,000 रुपये तक का जुर्माना, तीन महीने तक की जेल या दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती हैं। साथ ही वाहन चालक का लाइसेंस भी तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।
ट्रेनिंग के साथ तकनीकी तैयारी
गुरुवार को परिवहन विभाग ने एक अहम पहल करते हुए राज्यभर के प्रवर्तन अधिकारियों को डेसीबल मीटर के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी, जिससे अब वाहनों से निकलने वाली आवाज़ की प्रमाणिकता जांची जा सकेगी। सहायक परिवहन आयुक्त के अनुसार, विभाग को 47 डेसीबल मीटर मिल चुके हैं और जल्द ही सभी अधिकारियों को यह उपकरण उपलब्ध होंगे।
इसके साथ ही, 1989 की केंद्रीय मोटरयान नियमावली के तहत निर्धारित ध्वनि सीमा 7.5 मीटर की दूरी पर 80 से 91 डेसीबल तय की गई है। वाहन निर्माता कंपनियां इन्हीं मानकों को ध्यान में रखकर हॉर्न लगाती हैं, लेकिन बाद में कराए जाने वाले मॉडिफिकेशन न केवल अवैध हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं।
जनता परेशान, प्रशासन अब सख्त
हाल के दिनों में तेज आवाज वाले हॉर्न व बाइक में पटाखा जैसी आवाज निकालने वाले साइलेंसर का चलन बढ़ा है। जिसमें देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों में आमतौर पर देखा गया है कि युवा तेज आवाज वाले साइलेंसर लगाकर रफ्तार का प्रदर्शन करते हैं। कई कारों और ट्रकों में ऐसे हॉर्न लगाए गए हैं, जो आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। यह आवाजें खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए बेहद हानिकारक मानी जाती हैं। जिसके बाद सरकार ने शख्त रुख अपनाते हुए ये अभियान शुरू किया है और नियमों का पालन न करने वाले पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

