Sacred relics of Lord Buddha brought to Tawang : भगवान बुद्ध शाक्यमुनि के पवित्र अवशेष शनिवार को अरुणाचल प्रदेश के गदेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) पहुँचे। नई दिल्ली के नेशनल म्यूज़ियम से लाए गए, इन पवित्र पिपराहवा अवशेषों का मुख्यमंत्री पेमा खांडू, केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, तवांग मठ के मठाधीश, फरा डेमे तुल्कु, भिक्षुओं, भक्तों और दूसरे गणमान्य लोगों की मौजूदगी में पारंपरिक धार्मिक स्वागत किया गया। यह आगमन बौद्ध समुदाय और अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए एक खास मौका है, क्योंकि पवित्र अवशेष 13 साल के गैप के बाद तवांग लौट रहे हैं।
भगवान बुद्ध शाक्यमुनि से जुड़े ये पवित्र अवशेष उत्तर प्रदेश के पुराने पिपराहवा स्तूप से आए गए हैं, जो गौतम बुद्ध के जीवन और विरासत के करीब से जुड़ा हुआ है। नई दिल्ली के नेशनल म्यूज़ियम में रखे इन पवित्र अवशेषों का धार्मिक, ऐतिहासिक और आर्कियोलॉजिकल महत्व है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस मौके पर खुशी ज़ाहिर की और इसे राज्य के लिए बहुत सम्मान की बात बताई। उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर भी ज़ोर दिया, जिसमें शांति, दया, ज्ञान और दुनिया भर में भाईचारे पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, उन्होंने पवित्र निशानियों को सुरक्षित तवांग पहुँचाने में शामिल इंडियन एयर फ़ोर्स और दूसरी एजेंसियों की कोशिशों की भी तारीफ़ की।
बता दे यह प्रदर्शनी, भारत सरकार के कल्चर मिनिस्ट्री ने अरुणाचल प्रदेश सरकार, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन और नेशनल म्यूज़ियम, नई दिल्ली के साथ मिलकर आयोजित की गई, जो 31 अक्टूबर से 21 नवंबर, 2026 तक चलेगी। तवांग में प्रदर्शनी के बाद, पवित्र निशानियों को बोमडिला और नामसाई समेत दूसरे ज़रूरी बौद्ध सेंटर्स पर भी दिखाया जाएगा। इस पहल से उम्मीद है कि भक्तों को भगवान बुद्ध के प्रति सम्मान दिखाने का एक खास मौका मिलेगा और अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत, सांस्कृतिक पहचान और बौद्ध दुनिया के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव और मज़बूत होंगे।
