Roorkee village becomes LPG hub: LPG की बढ़ती जरूरतों और महंगाई के बीच रुड़की के एक गांव ने मिसाल पेश की है, जहां गौशाला सिर्फ पशुओं के संरक्षण का केंद्र ना होकर ऊर्जा प्रदान करने का नया मॉडल भी बन चुका है। ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम की सोच से गोबर गैस के जरिए LPG पर निर्भरता लगभग कम हो चुकी है और साथ ही गांव में बिजली उत्पादन करने का भी प्रयास किया जा रहा है। LPG की बढ़ती जरूरतों से गांव ने आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है जो देश के लिए एक प्रेरणादायक बन सकती है। गांव के प्रधान ने न केवल लावारिस गोवंश को नया जीवन दिया बल्कि गांव को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस पर निर्भरता से भी मुक्त किया है।
इब्राहिमपुर मसाई ग्राम पंचायत के हल्जौरा गांव के प्रधान ने बताया कि 2 साल पहले ऊर्जा संकट होने पर उन्हें गोबर गैस प्लांट बनाने का विचार आया था, तब उन्होंने गौशाला बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन स्वजल हरिद्वार के अधिकारियों से संपर्क किया और संपूर्ण कार्य योजना बनाकर सौंपा ,जिसे अधिकारियों ने पसंद भी किया। 2023 में स्वजल निधि से ग्राम पंचायत को 20 लाख रुपए की धनराशि भी मिली। इस परियोजना के लिए करीब एक बीघा जमीन का इस्तेमाल किया गया है जहां से पाइप के जरिए गांव के 40 घरो तक गैस पहुंचती है। और परियोजना के रखरखाव के लिए प्रत्येक घर से हर महीने ₹300 ग्राम पंचायत को जमा कर दिया जाता है।
यह गौशाला देश भर के लिए एक उदाहरण बन चुका है जिसमें 51 गोवंश , 40 बछड़े और बैल भी शामिल है। 11 गायों में एक गाय ही दूध देती है। उन्होंने बताया कि गौशाला ना होने पर गोबर बाहर से लाना पड़ता जिसमें किराया या डीजल खर्च होता इस पहल से गोसेवा भी हो रही है और पशुओं के चारे का खर्च भी शून्य हो रहा है। साथ ही साथ गोबर से बनी खाद तुरंत किसानों द्वारा खरीदी भी जा रही है।
