यह परंपरा स्विस पुरातत्वविद् और कला संग्रहकर्ता गुस्ताव रेविलियोड के दौर से चली आ रही है ।
5 peacocks presented to the United Nations: भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को 5 भारतीय मोर भेंट किए हैं। इनमें चार नीले मोर और एक दुर्लभ सफेद पंखों वाला नर मोर शामिल है। इस पहल के साथ संयुक्त राष्ट्र परिसर में भारतीय मोरों से जुड़ी दशकों पुरानी परंपरा एक बार फिर शुरू हो गई है।
एक विशेष समारोह में जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने ये पांचों मोर यूएनओजी की महानिदेशक तात्याना वालोवाया को सौंपे। इस मौके पर भारत की समृद्ध प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया गया।
1981 में भी भारत ने भेंट किए थे मोर
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र जिनेवा को मोर दिए हैं। इससे पहले 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से मोरों की एक प्रजनन जोड़ी जिनेवा भेजी थी। अब नए मोरों के आने से यह परंपरा दोबारा जीवंत हो गई है।
जिनेवा बायोपार्क चिड़ियाघर इन मोरों की देखभाल करेगा। शुरुआत में इन्हें करीब तीन महीने तक सुरक्षित बाड़े में रखा जाएगा। इसके बाद इन्हें संयुक्त राष्ट्र के यूरोपीय मुख्यालय से जुड़े एरियाना पार्क में खुले तौर पर घूमने की अनुमति दी जाएगी।
एक सदी से ज्यादा पुराना है मोरों का रिश्ता
एरियाना पार्क में मोरों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। यहां एक सदी से भी ज्यादा समय से मोर देखे जाते रहे हैं। इस परंपरा की शुरुआत स्विस पुरातत्वविद् और कला संग्रहकर्ता गुस्ताव रेविलियोड के दौर से मानी जाती है। उन्होंने 1890 में वह संपत्ति जिनेवा शहर को वसीयत कर दी थी, जहां आज संयुक्त राष्ट्र का परिसर स्थित है।
भारतीय मिशन के अनुसार, भारत की ओर से किया गया यह योगदान संयुक्त राष्ट्र परिसर की जैव विविधता को समृद्ध करेगा। साथ ही, यह भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ संयुक्त राष्ट्र के साथ उसकी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
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