चीनी महंगी, फिर भी किसान घाटे में क्यों? 16,087 करोड़ के नुकसान की क्या है वजह

What is the reason for the ₹16,087 crore loss : देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर मिठाई कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। अगस्त 2026 में औसत खुदरा कीमत करीब 52 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि कुछ शहरों में यह 65 रुपये तक बिक रही है।

इसके पीछे कई वजहें हैं। E20 इथेनॉल नीति के तहत गन्ने का एक हिस्सा चीनी की जगह इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा कमजोर बारिश, घटता चीनी भंडार और त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति दी है। साथ ही स्टॉक लिमिट सख्त की गई है और सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक जारी है। इन कदमों से आने वाले हफ्तों में कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

लेकिन किसान को फायदा क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चीनी महंगी है, तो गन्ना किसान की कमाई क्यों नहीं बढ़ रही? दरअसल, फरवरी 2026 तक चीनी मिलों पर किसानों का करीब 16,087 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया था। यानी बाजार में चीनी महंगी होने का फायदा सीधे किसान तक नहीं पहुंच रहा। मिलों की आर्थिक स्थिति, उत्पादन लागत और भुगतान में देरी के कारण किसान अभी भी अपने बकाये के लिए इंतजार कर रहे हैं।

कब सस्ती होगी चीनी?

सरकार के आयात से बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है और कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। हालांकि त्योहारों की बढ़ती मांग और कम भंडार के कारण तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। आने वाले कुछ हफ्ते चीनी की कीमतों के लिए अहम रहेंगे।

फिलहाल स्थिति यही है—चीनी महंगी है, लेकिन किसान की जेब तक उसकी मिठास नहीं पहुंच रही।

Srishti
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