हल्द्वानी High Court शिफ्टिंग के खिलाफ याचिका पर कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

Court hearing concluded on the petition: उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में नए हाईकोर्ट परिसर के लिए चिन्हित भूमि और उसे लेकर दी गई प्रशासनिक स्वीकृति को चुनौती देने वाली याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने की। याचिका में प्रस्तावित भूमि के चयन के साथ ही उसके वन क्षेत्र से जुड़े होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने उठाए भूमि चयन पर सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट को पहाड़ से मैदान में स्थानांतरित करने के फैसले पर राज्य गठन की मूल भावना और पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि यदि हाईकोर्ट का स्थानांतरण किया जाना है तो पर्वतीय क्षेत्र में ही किसी उपयुक्त स्थान पर विचार क्यों नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित भूमि को आरक्षित वन क्षेत्र और हाथी कॉरिडोर से जुड़ा होने का भी दावा किया है। वहीं, राज्य सरकार ने इन दावों का विरोध करते हुए प्रस्तावित भूमि को हाथी कॉरिडोर का हिस्सा मानने से इनकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तेज हुआ मामला

हाईकोर्ट के स्थानांतरण का मामला पहले भी न्यायिक विवाद में रहा है। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हल्द्वानी में वैकल्पिक भूमि के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया था।

इसके बाद राज्य सरकार ने हल्द्वानी में प्रस्तावित नए हाईकोर्ट परिसर के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज की। अगस्त 2026 में राज्य कैबिनेट ने हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में नए हाईकोर्ट परिसर के लिए करीब 38 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण को मंजूरी दी थी।

अब अदालत के फैसले का इंतजार

फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। ऐसे में अगली तस्वीर अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। हाईकोर्ट के स्थानांतरण का मुद्दा उत्तराखंड में लंबे समय से चर्चा और बहस का विषय रहा है, जिसमें प्रशासनिक सुविधा के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्र के हित, पर्यावरण और भूमि चयन जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं।

Srishti
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