Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 : मां नंदा के साथ कैलाश जाएगा चौसिंग्या खाडू, जाने क्या है मान्यता….

Nanda Devi Raj Jat Yatra : मां नंदा के साथ कैलाश जाएगा चौसिंग्या खाडू, जाने क्या है मान्यता…. : उत्तराखंड के चमोली जिले में हर 12 साल में आयोजित होने वाली एक धार्मिक यात्रा नंदा राजजात यात्रा। इस यात्रा को एशिया की सबसे कठिन यात्रा में से एक माना जाता है। इसे हिमालय का ‘कुंभ’ भी कहा जाता है। इस यात्रा में श्रद्धालु 19 दिन कठिन बुग्यालों की चढ़ाई पार करते हुए लगभग 260 किलोमीटर का पैदल सफर तय करते हैं।

नंदा देवी राजजात यात्रा (Nanda Devi Raj Jat Yatra) की शुरुआत पौराणिक और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग है। यह यात्रा सालो से चली आ रही है। कुछ इतिहासकारों और स्थानीय विद्वानों का मानना है कि यह परंपरा गढ़वाल और कुमाऊं के राजवंशों के समय यानी 7वीं से 8वीं शताब्दी के आसपास शुरू की गई थी।

मान्यता के अनुसार, मां नंदा हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी पार्वती का रूप है। स्कंद पुराण और अन्य कई ग्रंथों में नंदा देवी का उल्लेख हिमालय की रक्षक और शक्ति की देवी के रूप में किया गया है। यात्रा की कहानी के बारे में यह भी कहा जाता है कि मां नंदा अपने ससुराल (हिमालय) जाने के लिए इस यात्रा को करती हैं और स्थानीय लोग उन्हें विदाई देने के लिए इस यात्रा में शामिल होते हैं। रोचक बात है कि इस यात्रा की अगुवाई चौसिंग्या खाडू (भेड़) करता है जो हर 12 साल में पैदा होता है।

3 सितंबर को चौसिंग्या खाडू को लेकर कुरुड़ पहुंचेंगे ग्रामीण

वहीं इस साल 5 सितंबर 2026 में आयोजित होने वाली इस बड़ी जात यात्रा में मां नंदा की अगुवाई करते हुए कैलाश के लिए रवाना होने वाला चौसिंग्या खाडू (भेड़) नंदानगर के सुंग गांव में जन्मा है। जिसको लेकर गांव वालो में खास उत्साह देखा जा रहा है। इस बार आठ माहिने का चौसिंग्या खाड़ू सुंग गांव के वर्तमान उपप्रधान रमेश सिंह बिष्ट की गौशाला में पैदा हुआ है। जो की मां नंदा को समर्पित किया जाएगा। बता दे इस गांव में तीसरी बार चौसिंग्या खाड़ू के जन्म लेने से ग्रामीणों और नंदा भक्तों में खास उत्साह देखा जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि साल 2000 में सुंग गांव के बिलोख सिंह के यहां और 2014 में केदार सिंह बिष्ट के यहां चौसिंग्या खाड़ू पैदा हुआ था और दोनों अवसरों पर सुंग गांव से ही चौसिंग्या खाड़ू नंदा की राजजात यात्रा में शामिल हुआ था। वहीं अब तीसरी बार इसी गांव में चौसिंग्या खाड़ू के जन्म लेने से ग्रामीण इसे मां नंदा की विशेष कृपा मान रहे हैं।

इस बार (Nanda Devi Raj Jat Yatra) नंदा राजजात यात्रा में शामिल होने वाले चौसिंग्या खाड़ू को सुंग गांव के ग्रामीण 3 सितंबर को ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर लेकर पहुंचेंगे। यहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद खाड़ू बड़ी जात यात्रा में शामिल होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार चौसिंग्या खाड़ू को मां नंदा की यात्रा का अगुवाई और मार्गदर्शक माना जाता है। यह चौसिंग्या खाड़ू मां नंदा की उत्सव डोली के आगे चलने वाला प्रमुख आकर्षण रहता है।

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