21 लाख का रावण, फिर भी अधूरा दहन! देहरादून में दशहरे के जश्न पर उठे सवाल…

Ravana, costing 21 lakh, still incompletely burned : उत्तराखंड में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। देश भर के तमाम हिस्सों में दशहरा पर रावण का पुतला दहन किया जाने संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में दशहरा पर्व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां पर पहली बार 181 फिट लंबे रावण के पुतले के साथ 70 फीट ऊंचा कुंभकरण और 70 फिट ऊंचा मेघनाथ के पुतले का दहन किया गया।

अधजले रह गए रावण के सभी 10 सिर

लेकिन 181 फीट ऊंचा और ₹21 लाख की लागत से बना रावण का पुतला पूरी तरह नहीं जल पाया। बता दे इस भव्य पुतले का दहन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा रिमोट कंट्रोल और सेंसर के जरिए होना था। हालांकि, आखिरी वक्त पर रिमोट और सेंसर ने काम नहीं किया, जिसके कारण आयोजकों को पुतले में हाथ से आग लगानी पड़ी।

वहीं आग लगने के बाद रावण के पुतले का शरीर तो पूरी तरह जल गया, लेकिन उसका मुख्य हिस्सा यानी रावण के सभी 10 सिर और हाथ पूरी तरह सुरक्षित और अधजले रह गए। इस पूरे आयोजन और पुतले के निर्माण पर करीब ₹21 लाख का खर्च आया था, जिसके पूरी तरह न जल पाने और तकनीकी गड़बड़ी को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है।

सीएम धामी ने जनसभा को किया संबोधित

वहीं रावण दहन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसभा को संबोधित किया। सीएम धामी ने असत्य पर सत्य की जीत, अधर्म पर धर्म की जीत पर शुभकामनाएं दी। सीएम धामी ने कहा विजयदशमी का यह पर न सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर का मूल हिस्सा है बल्कि हमें मानव जीवन में सत्य और धर्म के मूल्य को बताता है।

उन्होंने कहा त्योहार हमें सीखाता है कि अहंकार की ज्वाला स्वयं उसे व्यक्ति का नाश करता है। इस त्योहार पर सिर्फ रावण का पुतला दहन नहीं करना है बल्कि हम सभी को अपनी बुराइयों को त्याग करते हुए सत्य, धर्म और मानवता की राह पर चलने का संकल्प लेना होगा। भगवान राम का जीवनकाल हमें ये सिखाता है कि कैसी भी विपरीत परिस्थिति क्यू ना हो लेकिन हमें अपने सिद्धांतों और विचारों का पालन करना चाहिए।

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Aarti Rawat
Aarti Rawat