पीपलकोटी टनल हादसा: 9 मजदूरों की मौत, कई अब भी लापता; CM धामी ने संभाली रेस्क्यू की कमान l


उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने से कई मजदूर फंस गए। CM पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की जानकारी लेते हुए राहत और बचाव अभियान की समीक्षा की।

9 workers dead, CM Dhami takes charge of rescue: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में गुरुवार 13 अगस्त की शाम निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में अचानक पानी और मलबा घुस गया। हादसे में कई मजदूर अंदर फंस गए, जिनमें से 9 की मौत की पुष्टि हुई है। घटना के बाद प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए हैं।

रातभर चला राहत और बचाव अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरंग में पानी और मलबा अधिक होने के कारण बचाव दल के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। रातभर चले अभियान में कई मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन इनमें से कुछ को बचाया नहीं जा सका।

अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनरी और विशेष बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरंग में पानी और मलबा होने के कारण अभियान बेहद सावधानी के साथ चलाया जा रहा है।

DM मौके पर, रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार घटनास्थल पर मौजूद रहकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से लापता मजदूरों की तलाश के लिए हर संभव संसाधन इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस और अन्य संबंधित टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी हैं।

सीएम धामी ने आपदा परिचालन केंद्र पहुंचकर लिया जायजा

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री देहरादून स्थित राज्य आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की।

CM धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली और उनके उपचार में किसी तरह की कमी नहीं रखने के निर्देश दिए।

पानी और मलबे ने बढ़ाई बचाव दल की मुश्किल

रेस्क्यू अभियान में सबसे बड़ी परेशानी सुरंग के अंदर जमा पानी, गाद और मलबे को बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक रात के दौरान सुरंग के भीतर पानी का स्तर काफी बढ़ गया था और ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियां भी सामने आईं। इन परिस्थितियों में बचावकर्मियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

मृतकों और घायलों की संख्या पर शुरुआती रिपोर्टों में अंतर

हादसे के बाद शुरुआती घंटों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे। कुछ रिपोर्टों में 7 मौतों की पुष्टि की गई थी, जबकि बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 बताई गई। इसी तरह सुरंग में मौजूद और बाहर निकाले गए मजदूरों की संख्या को लेकर भी शुरुआती आंकड़ों में अंतर रहा है। नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 9 है और कुछ लोगों की तलाश अभी जारी है।

हादसे के कारणों की जांच पर भी नजर

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर है। हादसे की परिस्थितियों और सुरंग के अंदर अचानक पानी तथा मलबा आने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच बाद में की जाएगी। परियोजना से जुड़े अधिकारियों और प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल सुरंग में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

चमोली का यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में निर्माणाधीन सुरंगों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को सामने लाता है। रेस्क्यू अभियान जारी है और प्रशासन की ओर से घटनास्थल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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